उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता पर ऐतिहासिक कार्यशाला, मुख्यमंत्री धामी ने बताया इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
हरिद्वार, 03 मई 2025 — देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया और दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड ने न केवल सभी नागरिकों के न्यायिक अधिकारों को समान किया है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण के नए युग की भी शुरुआत है। उन्होंने कहा, “यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज में समरसता और समानता स्थापित करने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।”

मुख्यमंत्री ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर उठाए गए प्रावधानों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब ऐसे संबंधों का कानूनी पंजीकरण आवश्यक होगा और महिलाओं को कानूनन गुजारा भत्ता व संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त होगा।
उन्होंने यूसीसी को धर्म, जाति या संप्रदाय के खिलाफ न बताते हुए कहा कि यह कानून किसी को लक्षित नहीं करता, बल्कि समाज में व्याप्त कुप्रथाओं को समाप्त कर समानता स्थापित करने का माध्यम है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “जैसे मां गंगा उत्तराखंड से निकलकर पूरे देश को जीवन देती है, वैसे ही यहां से शुरू हुआ यह कानून पूरे देश को लाभ देगा।”
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य है और इसके प्रचार-प्रसार के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। अगले तीन महीनों में लगभग पांच लाख छात्रों को यूसीसी के बारे में जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में दर्जनों गणमान्य अतिथि, जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या और कुलपति डॉ. सुरेखा डंगवाल ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।